आया था कोरा कागज लेकर ,रंग आए कुछ नए,
क्या थे वो पता नहीं , क्यों थे वो पता नहीं //
पता था मुझे खेलना है आगे ,
जिंदगी के राह में चलना है आगे //
रंगोकी कश्मकश में मै यु उलज़ गया ,
असली और नखली में अंतर भूल गया //
खुद अपने हातोंसे क्या बनता अपने जीवन का चित्र ,
वोह तो उनके भी है जिनके ना हाथ है ना मित्र //
क्या लिखू उस चित्र के बारेमें जो मेरा पहला था ,
कहा खुदाने यह तेरा पहला और आखरी था //
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